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भारत का प्रेम: A Tribute To MissileMan[Hindi Poem]

A Tribute poem to Bharat Ratna, A. P. J. Abdul Kalam 

=भारत का प्रेम=

जन्म हुआ वहा
खाने को रोटी न थी जहा
बचपन बिता कड़की में
पर सपने चमके उस बस्ती में,

गरीबी अभिश्राप नही ,
नन्हा कलाम हार मानने को तैयार नही
खूब की पढ़ाई  ढिबरी के दिए जला के
अम्मी अब्बु बहना अंकल
मन लगा कर सिख ली उन्हसे
मानवता की अच्छी सच्ची बातें,

कट गया बचपन, अब्दुल का गांव में
बहुत होशियार था ,
सो दाखिला लिया , मद्रास के हवाई विभाग में,

पढ़ने में बहुत तेज़ था  कलाम
कलम उसकी चलती थी
जैसे चलती है कोई वायुयान,

न था कोई घमन्त उसे
सपने की निशान पे वे कभी न चुके
पर गरीबी को कहाँ ये मंजूर था,
आ गयी मुसीबत बननके
जैसे उसका दस्तूर था ,

पैसे नही थे फीस के,
पढ़ाई अभी बाकि थी,
आसू कैसे पोछे होंगे उन्होंने,
जब वैवाहित बहना ने चुपके से,
बेच दी अपनी कानो की बाली थी ,

महान थे वो,
सारे मुसीबत से गुजर गए
उनकी कड़ी बेहद कड़ी मेहनत से
उनके इंगिनीयर बन्ने के सपने सवर गए,

तब आया एक मोड़
जिसे TURNING POINT
उन्होंने नाम दिया
पायलट बनने का सपना जब था टुटा
उन्होंने तब सच को स्वीकार कर,
भारतीय वैज्ञानिक का हाथ थाम लिया,

उनका आना भर था की,
भारत का अंतरिक्ष युग चमक उठा,
PSLV3, अग्नि , रोहिणी , पृत्वी
सब को सफलता पूर्वक निर्माण कर
हमारा ” मिसाइल मैन ” धमक उठा,

उनकी कर्म निष्ठा और राष्ट्र प्रेम देख कर
उनको राष्ट्रपति मनाने की मांग उठी
भारत  रत्न युक्त राष्ट्र पति के आने से
भारत ने 2020  तक विक्सित होने की नीव रची,

बच्चे उनको प्रिय थे,
प्रक्रति उनको लुभाती थी,
मुस्कुराना और जीवन को जीना,
उन्हें ये ही सिखाती थी,

जीना चाइये कैसे,उन्हें ये पता था
तभी तो दुसरो को समर्पित
IGNITED MINDS ,WINGS OF FIRE
उन्होंने बड़े प्यार से लिखा था,

सर ,
आपकी लिखी बातें ,
आज भी हर जगह पढ़ी जायेगी
क्या कमाल का मिसाल दे गए हो आप,
घरों घरों में बस यही बोली ,बोली जायेगी..

“आपके दिखाए मार्ग पर
चलना ही मेरा जीवन होगा,
ऐसे ही जीना है हमे भी अब
बस अब से यही हमारा प्रण होगा||”

“रो रहा है आज  भारत
खो दिया उसने अपना एक रत्न है
पर सदा जिवित हो आप दिलो में,
आज भी और कल भी
आप भारत के एक अभिन्य अंग है…”

BHARAT RATNA ABUL PARKER  JANUYAL AABDIN ABDUL KALAM
-ExPresident Of India
(1931-2015)

nnn

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Hello i am Prashant , presently working in a Event Management Domain. I started writing when i was in class 8th and have received many Awards and prizes for my poetry. For me writing is expressing my Feelings through my words. and appreciation from others makes me inspires more to write.

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Prashant Kumar
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